Prashant Suryawanshi 26 Oct 2025 शायरी अन्य मैं सबको खो देता हूँ 9590 0 Hindi :: हिंदी
मैं हजारों में किसी एक को अपना मानता हूँ जिसे अपना मानता हूँ उसमें पुरा डूब जाता हूँ अच्छों को मै बूरा लगता हूँ बुरों को भी बूरा लगाता हूँ बनती नहीं किसी से मेरी मैं सबको खो देता हूँ