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बहकाया-क्या ऐ जुल्म हैं

Rupesh Singh Lostom 09 May 2023 शायरी प्यार-महोब्बत बहकाया 41982 2 5 Hindi :: हिंदी

क्या ऐ जुल्म हैं की 
मैंने तुझे चाहा 
या फिर कसूर तेरा हैं 
जो तूने मुझे बहकाया !

तेरी चाहत में
मैं मसगुल हूँ 
तेरे इश्क़ में ग़ुम हूँ 
पर क्या ऐ नहीं 
मैं तेरा आशिक़ पूर जोर हूँ !

मैंने माना हैं मनत 
उस रव से 
तू खुश रहे सदा
मुस्कुराती रहे सर्वदा  
ख़ुशी में चूर रहे 
गमो से दूर दूर रहे 
मगर तू मेरी ही महबूब रहे !

तू जानती हैं की मैं 
तेरा ही बन बैठा हूँ 
फिर भी तू मुझ से 
सदा दूर दूर रहे !

Comments & Reviews

yashoda
yashoda अति सुन्दर विचार

2 years ago

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Mohd Raees
Mohd Raees Please keep our post in Urdu

3 years ago

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