Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri kavita #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar #Rambriksh Bahadurpuri 37511 0 Hindi :: हिंदी
कविता -सपने सपने बुन लो गुन लो धुन लो खुद ही चुन लो सपने बुन लो। सारे सपने होते अपने सोंच समझ कर दिल की सुन लो। गुन लो धुन लो सपने बुन लो। आंखें मूंदे सपने देखे सच होते क्या! खुद ही गुन लो। दिल की सुन लो सपने बुन लो। आंख खोल कर देखो सपने नीद कहां फिर रातें गिन लो। सपने बुन लो गुन लो धुन लो। हर एक सपना ऊंचा देखो ऊंचा ऊंचा सोंच समझ कर खुद ही चुन लो। सपने बुन लो गुन लो धुन लो। रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...