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वृद्ध गुलाब-क्यूँ इतने खामोश हो तुम साँस है बेहोश हो तुम

Preksha Tripathi 23 Jun 2023 कविताएँ अन्य 40246 1 5 Hindi :: हिंदी

क्यूँ इतने खामोश हो तुम? 
साँस है बेहोश हो तुम। 
जी रहे हो जानकर कि
और कुछ न हो सकेगा।
खिल उठा हूँ अब तो केवल
मधुरसों का भोग होगा।। 
काटते हो उम्र अपनी 
कंटकों के बीच में। 
सूख जाते फिर भी खिलते
बस एक ही जल सींच में।। 

प्रेक्षा त्रिपाठी ✍️
प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश

Comments & Reviews

VIVEK KUMAR PANDEY
VIVEK KUMAR PANDEY बहुत सुन्दर🙏🙏

2 years ago

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