Raj Ashok 01 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मन्त्र 29659 0 Hindi :: हिंदी
फिर पसीने कि बहती बुंदो । ने कहा है। जमाने से चुनौतियो से भरे दौर चाहे चले कितने और....... इम्तिहानो के , यो घुल भरी चले चाहे आँधीयाँ अभी तो बाकी है। जज्बा ओर टकराने का तुफानों से.... मुकाम जो हमने चुना है। हासिल होगा....... वो दूर किनारा भी घबराने दो लोगों को घबराहट, ये रूकावट नहीं जीवन की, जो हासिल होना है । मुकाम......यहाँ वो एक मेहनत का रास्ता है। समझ , ये कर्म का सिद्धात ,है । जो गीता का उपदेश है एक उदघोष है । जो सिखाता हे। दुनियाँ को... एक मन्त्र जीने का