Ujjwal Kumar 18 Dec 2025 कविताएँ बाल-साहित्य #wochhotasameraganw वो छोटा सा मेरा गाँव-2 #writerujjwal shrivastav 10041 0 Hindi :: हिंदी
*वो छोटा सा मेरा गाँव-2* वो छोटा सा मेरा गाँव, जहाँ भोर हमें जगाती थी, चिड़ियों की मीठी आवाज़ मन को रोज़ सहलाती थी। कच्ची पगडंडियों पर चलकर खेतों तक हम जाया करते, मिट्टी की सौंधी खुशबू को जी भरकर अपनाया करते। नदिया की ठंडी लहरों में सावन संग भीग जाते थे, बरगद की छाँव तले बैठ घंटों गीत सुनाते थे। दीपक की हल्की लौ में रातें कितनी सुहाती थीं, दादी की कहानियाँ भी नींद मीठी करवाती थीं। नगर की चकाचौंध ने हमको दूर कहीं भटका डाला, पैसे की इस भीड़तंत्र में मन का कोना रह गया खाली। ना खेतों की हरियाली है, ना मेड़ों की मुस्कानें, ना माटी के वो राग मिले, ना प्रेम भरी पहचानें। सोचता हूँ वापस जाऊँ वहीं पुरानी राहों पर, फिर जी लूँ वही सुकून उन सादगी भरी चाहों पर। वो छोटा सा मेरा गाँव आज भी दिल को बुलाता है, हर धड़कन की थरथराहट में अपना नाम दोहराता है। *युवा रचनाकार* *उज्ज्वल कुमार श्रीवास्तव*