Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

उठा गांडीव अर्जुन- रण में चलना है।

Raj Ashok 25 Jul 2024 कविताएँ धार्मिक रण में 26826 0 Hindi :: हिंदी

यह वही क्षण है ।
ये ,वही रण है।।
वत्स,
जिसकी उम्मीद में 
सीखा  चलना ,
तुमने,हर  शस्त्र,
कर अब मन से ध्यान 
तेरे काम आएगा ।
तेरा  युद्ध कौशल और गुरू ज्ञान ।। 
अब यू खड़ा युद्ध के मैदान में
व्यर्थ का शोभ ना कर 
यह मार्ग कर्तव्य पथ है।।
यही कर्म  भूमि है ।।
जीवन को क्यों बांधता है।
अब  रिश्तों - नातों से  
आज तु रण में खड़ा है । अर्जुन
अब ,तुझे और क्या जानना है।।
ना देख 
अपनों की परछाइयां ।।
यहां , हर क्षण नर-संहार बोलेगा।
यह वक्त है ।। संघर्ष का 
अब क्या
यहां कोई खुशीयों का  त्योहार बोलेगा।।
उठा अपना,गांडीव अर्जुन
रण में चलना है ।।
तैयार है । मैदान कुरूक्षेत्र का
अब महाभारत के लिए..... वत्स

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: