Raj Ashok 25 Jul 2024 कविताएँ धार्मिक रण में 26826 0 Hindi :: हिंदी
यह वही क्षण है । ये ,वही रण है।। वत्स, जिसकी उम्मीद में सीखा चलना , तुमने,हर शस्त्र, कर अब मन से ध्यान तेरे काम आएगा । तेरा युद्ध कौशल और गुरू ज्ञान ।। अब यू खड़ा युद्ध के मैदान में व्यर्थ का शोभ ना कर यह मार्ग कर्तव्य पथ है।। यही कर्म भूमि है ।। जीवन को क्यों बांधता है। अब रिश्तों - नातों से आज तु रण में खड़ा है । अर्जुन अब ,तुझे और क्या जानना है।। ना देख अपनों की परछाइयां ।। यहां , हर क्षण नर-संहार बोलेगा। यह वक्त है ।। संघर्ष का अब क्या यहां कोई खुशीयों का त्योहार बोलेगा।। उठा अपना,गांडीव अर्जुन रण में चलना है ।। तैयार है । मैदान कुरूक्षेत्र का अब महाभारत के लिए..... वत्स