Sudha Chaudhary 20 Jun 2023 कविताएँ अन्य 24213 0 Hindi :: हिंदी
दूर से जिन्दगी गुनगुनाती रही , कभी पास आ मुस्कुराती रही। कब लगा तुम मिले मुझे इस डगर , चुपके चुपके ये खुशियां चुराती रही। उस विभा पार तुम जो कहो तो चले , कितने सपने में आंखें सजाती रही। सुधा चौधरी बस्ती