Archana Singh 31 Dec 2024 कविताएँ प्यार-महोब्बत तजुर्बा 22400 0 Hindi :: हिंदी
नमस्ते दोस्तों 🙏🏻🙏🏻 " तजुर्बा " ..... मैंने जिंदगी का तजुर्बा तब पाया , जब मैंने अपने सबसे अज़ीज़ को खोया ! मैंने जिंदगी का तजुर्बा तब पाया , जब मैंने भीड़ में भी खुद को ही अकेला पाया ! मैंने जिंदगी का तजुर्बा तब पाया , जब मैंने अपने सगे संबंधियों- रिश्तेदारों से खुद को बेतकल्लुफ़ पाया ! मैंने जिंदगी का तजुर्बा तब पाया , जब खुद के आंसू से भींगे अपने हाथ को पाया ! जिंदगी का हर तजुर्बा , घायल कर गई और ... ना चाहते हुए भी अर्चना को अपना कायल कर गई ! धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐