शरद भूषण मोंगरा 07 May 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत नारी सौंदर्य, सौंदर्य, सुंदरता 3901 0 Hindi :: हिंदी
" नारी सोंदर्य" बिन साज सिंगार किये ही वह मनभावन तरुनी लगती थी पीताम्बर कभी स्वेताम्बर में मन हरनी हिरनी लगती थी चपल नहीं थी शांत भाव में खिली कुमुदनी लगती थी वह कुमारी सुकुमारी मधुबन पे जवानी लगाती थी धीर दिशाओं बजती सी मधुर रागनी लगती थी प्रकर्ति की सुर सुन्दरी थी सारंगी सी हंसती थी लोल लाज से झुके हुवे वह दिल का दर्पण खोल गई और अधर तनिक से हिले नहीं वह फिर भी सबकुछ बोल गई