Saurabh Sonkar 15 Sep 2025 कविताएँ हास्य-व्यंग कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए पैसे का घमंड तुम्हें है गर तो पेशे का घमंड मुझे भी है बेरोजगारी में मैंने जो कमाया है पैसे से कमा सकते नहीं करता हूँ मैं सम्मान अगर संस्कार मेंरे हैं तुम ये समझो स्वाभिमान की बात जब आए फिर झुकना स्वीकार नहीं घमंड समझो या तुम जिद फिर किंचित हटना स्वीकार नहीं संवाद पसंद मुखर व्यक्ति हूँ शब्दों से गिरना संस्कार नहीं पैसे से ही सब कुछ मिलता तालीम की फिर क्या कीमत है किससे कैसी बात है करनी तालीम जरा तुम सीख लीजिए किससे कैसी बात है करनी व्यक्ति देखकर बोला करिए जब तक व्यक्ति समझ न आए कुछ भी मुँह न खोला करिए आपही होंगे लाट गवर्नर बडके सोंच समझ कर बोला करिए चापलूसों के चक्कर में किसी हेतु न गलत धारणा रखिए कलम उठाई है मैंने लेखनी से होगा कोई समझौता नहीं लिखना मेरा पेशा है मैं हर मुद्दे पर लिखता रहता हूँ कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए आशुलिपिक रचना - संदेश रचनाकार - सौरभ सोनकर 15883 0 Hindi :: हिंदी
कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए पैसे का घमंड तुम्हें है गर तो पेशे का घमंड मुझे भी है बेरोजगारी में मैंने जो कमाया है पैसे से कमा सकते नहीं करता हूँ मैं सम्मान अगर संस्कार मेंरे हैं तुम ये समझो स्वाभिमान की बात जब आए फिर झुकना स्वीकार नहीं घमंड समझो या तुम जिद फिर किंचित हटना स्वीकार नहीं संवाद पसंद मुखर व्यक्ति हूँ शब्दों से गिरना संस्कार नहीं पैसे से ही सब कुछ मिलता तालीम की फिर क्या कीमत है किससे कैसी बात है करनी तालीम जरा तुम सीख लीजिए किससे कैसी बात है करनी व्यक्ति देखकर बोला करिए जब तक व्यक्ति समझ न आए कुछ भी मुँह न खोला करिए आपही होंगे लाट गवर्नर बडके सोंच समझ कर बोला करिए चापलूसों के चक्कर में किसी हेतु न गलत धारणा रखिए कलम उठाई है मैंने लेखनी से होगा कोई समझौता नहीं लिखना मेरा पेशा है मैं हर मुद्दे पर लिखता रहता हूँ कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए आशुलिपिक रचना - संदेश रचनाकार - सौरभ सोनकर