akhilesh Shrivastava 19 May 2026 कविताएँ समाजिक मां अमूल्य है 2779 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
*संतानों की सांसें है "मां*"
मां ईश्वर है मां जननी है
मां अनंत है मां अमृत है
मां संस्कृति है मां ममता है
मां संस्कार है मां शिक्षक है।।
मां भक्ति है मां शक्ति है
मां दर्पण है मां है सर्मपण
मां विनम्र है मां करुणा है
मां धैर्य है मां शीतल है ।।
संतानों की सांसें है मां
संतानों की संरक्षक मां
जीवन में मत भूलो मां को
संतानों का जीवन है मां।।
सुख की ठंडक देती है मां
दुख की तपन हर लेती मां
चोट लगे याद आती मां
दर्द में राहत देती है मां ।।
संतानों की ज्योति है मां
अंधकार है उस जीवन में
जीवन से जिनके छिन जाती
प्यारी और दुलारी मां।।
नई परंपरा अपनाकर तुम
एक दिन मां का मना रहे हो
मां के प्रेम प्यार का कर्जा
एक दिन में चुका रहे हो।।
देवतुल्य प्यारी माता की
महिमा तुम क्यों घटा रहे हो
मदर्स डे मनाकर तुम क्यों ?
सूरज को दीपक दिखा रहे हो।।
मां को हर क्षण याद रखो तुम
मां का आदर सम्मान करो
जीवन में अमृत बरसेगा
मां पर तुम अभिमान करो।।
*मातृ दिवस पर सभी मांताओं को प्रणाम*
रचियता :---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...