Amit Kumar Ranjan 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 65989 0 Hindi :: हिंदी
संदेश
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लूट लिया इस देश को,
धर्म का जाल बिछा दिया।
जो समाज जाति मानी जैसे,
वैसे उनका भगवान बना दिया।।
धर्म की बेड़ी तोड़ कर सबका,
मानवता को बचाना होगा।
क्या भला है धर्म को इस देश को,
वंचितो, शोषितो बताना होगा ।।
पैसो का मत करो घमंड तुम,
पिछड़ा वर्ग के लोगो तुम।
नही मान रहे अपने पूर्वजों के विचार को,
अपनी करनी का भोगोगे तुम।।
चुप रहे तो खत्म हो जाओगे,
कही जाओ नही बच पाओगे।
होश सम्भालो कहना मानो,
अपने,आप और इतिहास जानो।।
पक्षी का रखवाली गर,
कसाई शिकारी से कराओगे।
थोड़े-थोड़े कर धीरे-धीरे ही ,
एक दिन सब के सब मेरे जाओगे।।
कलम से--
अमित रंजन
ग़ाज़ीपुर (यूपी)