Anilkumar Rathwa (Sameer) 29 Sep 2025 कविताएँ देश-प्रेम "संघ का स्वर" 22336 0 Hindi :: हिंदी
संघ का स्वर है राष्ट्र का नारा, भारत माँ का ऊँचा सितारा। अनुशासन जिसकी पहचान है, सेवा ही जिसका जीवन-प्राण है। न किसी पद की लालसा यहाँ, न धन-दौलत की आशा यहाँ। बस एक ही ध्येय, एक ही सोच, भारत माता रहे सदा ओजस्वी और पोष। शाखाओं में गूँजता गीत है, संघ का बल, संघ का मीत है। निष्ठा और त्याग की यह राह, युवाओं को दिखाती सच्ची चाह। धरती का कण-कण कहता है, संघ ही भारत का रक्षक है। आंधी-तूफ़ानों से जो न डरे, राष्ट्रहित में जो जीवन भरे। हिन्दुत्व का संदेश सुनाता, सच्चे जीवन का मार्ग दिखाता। सेवा, संस्कार, शक्ति का मेल, यही है संघ का सच्चा खेल। आओ युवाओं, कदम बढ़ाओ, संघ की ज्योति को और जलाओ। भारत माँ को विश्वगुरु बनाना, हम सबका है सच्चा ठिकाना।