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"सब्र का फल"

Anilkumar Rathwa (Sameer) 06 Feb 2026 कविताएँ अन्य "सब्र का फल" 5456 0 Hindi :: हिंदी

वक्त की गर्द में आज अगर तू खोया है,
मुसीबतों के कांटों को अगर तूने बोया है,
तो घबरा मत, ये बादल भी छंट जाएंगे,
आज जो मुश्किल हैं, वो कल सवेरे कट जाएंगे।

​सब्र कर ऐ राही, अभी इम्तिहान जारी है,
कल तेरा होगा, आज जिसकी भी बारी है।

​वो जो हंसी उड़ाते हैं तेरी मजबूरियों पर,
जो मजे लेते हैं तेरी इन तल्ख दूरियों पर,
वक्त का पहिया जब अपनी चाल बदलेगा,
तब उनकी खामोशी में ही उनका गुरूर पिघलेगा।

​उतर जाएंगे चेहरे उनके, जो आज तंज कसते हैं,
झुक जाएंगी नजरें उनकी, जो आज तुझ पर हंसते हैं,
तेरी खामोश मेहनत जब शोर मचाएगी,
दुनिया खुद-ब-खुद तेरे कदमों में झुक जाएगी।

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