Uday singh kushwah 07 Jul 2023 कविताएँ अन्य गूगल याहू बिंग 48482 0 Hindi :: हिंदी
रिमझिम बरसता सावन आया। घर आंगन में खुशियां लाया। बैठा पवन देख सुमधुर मुस्कुराया। याद में प्रीतम का चेहरा मुरझया। बहती सरिता ने यौवन दिखलाया। पपीहा ने बूंदों से खुद को मिलाया। तरुवरों ने झूम झूमकर गीत गाया। निर्झर बहता इठलाता धरा पर आया । पर्वतों के क्षितिज पर सौरभ महक आया। धानी चुनर ओढ़ धरा ने अवगुंठन से चेहरा दिखलाया। धरा ने प्रीत का नभ से यह कैसा रिश्ता निभाया। आम की डालियों पर झूलों ने कजरी गीत सुनाया। उदय सिंह कुशवाहा ग्वालियर, मध्यप्रदेश