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रूपवती

शरद भूषण मोंगरा 24 Apr 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत रूपवती, प्रेमिका, निहारिका, 4487 0 Hindi :: हिंदी

तुम रूप का भंडार लिए सोनभद्र नदी बनी
मैं छोटा सा आकार लिए एक बूंद जल बना।
तुम भिन्न-भिन्न श्रंगार किए एक गंगधार बनी
मैं सिर्फ ठूंठ पत्थर सा हिमालय का हिस्सा बना।
तुम बह निकली प्रेम का उन्माद ह्रदय धारकर
किंतु मैं तुम्हें देखकर आनंद का श्रजन हार बना।


शरद भूषण मोंगरा
कवि गीतकार लेखक।

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