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रिश्ता

Amit Kumar Ranjan 09 Aug 2024 कविताएँ समाजिक 40061 0 Hindi :: हिंदी

यहां रिश्ता भी अमीरी गरीबी से है निभाया जाता है 
दुःख सुख भी उसी से बताया जाता है कितना अच्छा है वो मेरा प्यारा लोगो को हर बार दिखाया जाता है 

भावनाओं का कोई कद्र नहीं है 
पैसो का है बोल बाला है यहां  
हम टूट जाते है लोगो का बात सुन सुन कर 
यही आया जमाना है यहां 

आदमी थक जाता है जिम्मेदारी को निभाते निभाते 
फिर बाद मे पूछा जाता है की आपने किया है क्या है 

समय के रफ़्तार मे कही खो सा जाता है आदमी 
कोई ना होता है संभालने वाला 

बेदर्द लोग क्या जाने मोहब्बत भी किसी का नाम है वह आह भी नहीं भरते  खुद से करना लोगो भी अपना शान है 

कलम से-
              अमित कुमार रंजन 
              गाजीपुर (यूपी )

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