Ujjwal Kumar 15 Jun 2023 कविताएँ अन्य रक्तदान 30005 1 5 Hindi :: हिंदी
कभी किए थे पुण्ये बड़े, तो कभी पाप के भागीदारों। कभी किसी के सपनों को, केवल दान धर्म बचाता है। बहुत पसंद है तुम्हें कर्ण, उसका दान धर्म जो दिख जाता है। तो तुम भी निश्चय मन में कर लो, कभी किसी के ईश्वर होगे। कभी जान बचाओगे, तुम स्वयं रूप नारायण धार के, रक्त दान कर जाओगे। ✍उज्ज्वल कुमार
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