PRIYA TIWARI 14 Jan 2026 कविताएँ अन्य 15079 0 Hindi :: हिंदी
एक दिन मिले थे तुम हमसे , कुछ तो कहा था तुमने हमसे । पर क्या करे , हम नादान पंछी , बदल दिए अपनी राहो को तुमसे। कुछ दूर चले ही थे कि याद आया , दिल तो छोड़ आए उसी राह पे , खुद को भुल आए हम उसी राह पे । न जाने वह परिंदा मिलेगा कहा , इसी ख्याल में डूबे बैठे हम उसी राह पे । पता नहीं ववो इस डगर आएगा या नहीं , पता नहीं वो इस पहर फिर से कभी आयेगा या नहीं । इन्हीं ख्यालों में डूबी जा ही रही थी कि , कुछ आहट हुई कुछ-कुछ मिला कही । मालूम हुआ , ये वो नहीं , पर आज भी मै उसी राह पे अपना दिल संज्यो रही । (२)... (लेखिका - प्रिया तिवारी)