Anilkumar Rathwa (Sameer) 19 Jan 2026 कविताएँ समाजिक “पिता का साया” 9921 0 Hindi :: हिंदी
पिता का हाथ कंधे पर हो, तो हालात डराया नहीं करते। आँखों में अगर उनका भरोसा हो, तो तूफ़ान रास्ता बदल लिया करते। दुनिया झुकाने आए तो आने दो, पिता की सीख सीने में खड़ी होती है। भीड़ सवालों से तोड़ना चाहे, तो उनकी खामोशी ढाल बन जाती है। उन्होंने शब्द कम कहे, पर हौसले पूरे दिए। अपने सपनों को पीछे रखकर, हमारे सपनों को पंख दिए। युवाओं— अगर पिता साथ हैं, तो हार सिर्फ एक सबक है। और अगर पिता नहीं भी हैं, तो उनकी दी हुई हिम्मत सबसे बड़ी ताकत है। कंधे पर वो हाथ आज दिखे या याद बन जाए— उसकी गर्माहट ज़िंदगी भर साथ निभाती है। इसलिए सिर ऊँचा रखो, कदम मजबूती से बढ़ाओ— पिता का भरोसा कभी गिरने नहीं देता, और कभी झुकने नहीं देता।