Shiwani vishwakarma 09 Apr 2023 कविताएँ अन्य बवंडर,तूफान,भँवर 112620 0 Hindi :: हिंदी
ये आँधी,ये तूफान, ये भँवर बवंडर क्या हैं इनका पैगाम, कि मत कर इन बेबस प्रकृति से खिलवाड़, नहीं मानता रे मनुष्य! रहता इनको छेड़ता, फिर क्यों होता हैं इनके प्रकोप से भयवान, यह कर देती छिन्न-विछिन्न सब कुछ, कभी-कभी नष्ट कर देती सब कुछ, मानो पूरी कायनात पर हो जाता हैं इन्हीं का शासन, ये आंधी,ये तूफान,ये भँवर बवंडर।