Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

"प्रेम, समरसता और बंधुत्व"

Ajay kumar suraj 18 Apr 2025 कविताएँ समाजिक #"प्रेम,_समरसता_और_बंधुत्व" #अजय_कुमार_सूरज 25577 0 Hindi :: हिंदी

"प्रेम, समरसता और बंधुत्व" 
1.
न हो द्वेष मन में, न बैर का रंग,
हर एक साँस में हो, प्रेम का एक संग।
भले ही अलग हो पहनावा, नाम,
पर सबके भीतर एक-सा हो एक राग।

2.
नज़र से न बाँटो किसी को कभी तुम,
न भाषा, न मज़हब से मापो किसी ग़म।
जहाँ प्रेम हो, वहीं ईश्वर का वास,
जहाँ बैर हो, वहाँ उजड़े हैं राह।

3.
समरसता वह दीपक है जो जलता रहे,
अँधेरों में रोशनी बिखेरे।
न हो कोई ऊँचा, न नीचा हो,
सबका हक़ समान, यही सच्चा नज़रिया हो।

4.
बंधुत्व हो जैसे बरसता घटा,
हर दिल को भीगने दे बिना कुछ कहा।
ना कोई पराया, न कोई अपरिचित,
हर मन में हो ‘अपना’ सा कोई संचित।

5.
चलो हम बनाएँ दुनिया को कुछ नया,
जहाँ न हो कोई दूरी, न हो साज़िशें कोई सारा।
जहाँ सबको मिले एक जैसी ख़ुशी,
न हो कोई छोटा, न कोई बड़ा भाई।

अजय कुमार 'सूरज'

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: