संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह दोहा कविता बहुत ही ज्ञान वर्धक है. जिसे पढ़कर आप पाठक गन जीवन में आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं. अतः आप पाठक गण से आग्रह है एक बार इस साइट पर अवश्य पधारें. आप का हार्दिक स्वागत है. 39 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_दोहा छंद पाना है तुमको अगर, यहां सफल किरदार। होगा सब गुण सीखना,करो पार मझधार।। आये जीवन में तभी ,खुशियाँ भरी बहार। निर्मल रखो विचार को, जीवन हो गुलजार।। ऐसा बनना तुम यहाँ ,दुर्लभ जो हो चीज। रखो अटल विश्वास को,जैसे अनुपम बीज।। बनना यदि तुम चाहते ,दुनिया में जो हीर। करना होगा श्रम बड़ा,तब मुख पर हो नीर।। सबको यहाँ पसंद है ,चमचम करता स्वर्ण। पड़े कमाना खूब धन,गान सुनें प्रिय कर्ण।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....