Raj Ashok 21 Jul 2024 कविताएँ हास्य-व्यंग नपा -तुला 37661 0 Hindi :: हिंदी
हजारों खेल खेले हैं । हमने इस बालू रेत पर.........!! वो खेल आज की उलझनों से अच्छे थे । बड़े नहीं उस वक्त हम बच्चे थे ।। वक्त की उड़ान और क्या - क्या बदलेगी।। खेल बदल गये...... जैसे,अब बैटरी से सैल बदल गये।। नाज़ुक से इस वक्त में बात चीत के मैल बदल गये आज के खेल और खिलाड़ी पहले काग़ज़ पे खेले जाते हैं। शब्द भी देखो मर्यादित और सीमित आचरण में बोले जाते हैं। अब तों जीवन का सीमांकन हो गया ।। सब कुछ नपा - तुला सा है ।। यहां ......! आदमी बदला - बदला सा है। यहां.......?