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नित संकट है सामने-डोल रहा ईमान धरती के भगवान तो

संदीप कुमार सिंह 11 Jul 2023 कविताएँ अन्य मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20906 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
नित संकट है सामने,डोल रहा ईमान।
धरती के भगवान तो,बना रहा सुनसान।।


धरती के भगवान को,मरना पड़ता यार।
वहम नहीं पालें यहां,रखिए प्यार  अपार।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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