Rameez Raja 05 Mar 2026 कविताएँ समाजिक महिला दिवस विशेष 5633 0 Hindi :: हिंदी
तुम हो तो संसार है 😊 कहीं आँचल की छांव है, कहीं ममता का समंदर, सृष्टि का हर रूप समाया, बस तुम्हारे ही अंदर। माँ बनकर तूने पहली सांस का मोल सिखाया, अपनी नींदें बेचकर, मेरा हर सपना सजाया। वो लोरी, वो झिड़कियाँ, वो बिना कहे सब सुन लेना, समझ लेना शायद ईश्वर का ही रूप है, माँ तुम्हारा होना। बहन की वो शरारतें और रुठकर फिर मान जाना, पिता के गुस्से से बचाना और अपना हिस्सा मुझे खिलाना। लड़ना झगड़ना, हँसना रोना, एक दूसरे को रुलाना, टाँग खींचना क्या आनंद देता है, वो कच्चे धागों का पक्का रिश्ता, जो घर को जोड़ता है, एक बहन का साथ ही तो, भाई को इंसान बनाता है। अब आते हैं अर्धांगिनी पर पत्नी के रूप में, तूने मेरा आधा आकाश संभाला, अंधेरी राहों में भी, तूने विश्वास का दिया जलाया। कंधे से कंधा मिलाकर, जो तूने घर को मंदिर बनाया, मेरी जीत में तेरा ही हिस्सा, सबसे ज्यादा नज़र आया । मेरे जीवन में आकर तूने मुझे पूरा कर दिया, चेहरे पर मुस्कान सी छा जाती है हर दिन जब तुम कहती हो, अजी सुनते हो जी...... शिक्षिका बनकर तूने, अज्ञान का हर कोहरा काटा, सही और गलत का फर्क, बड़े सलीके से हमें बाँटा । डांटना डपटना था अधिकार आपका, अरे ऐसे ही तो बिना गहराई में गए मोती नहीं मिलता, तराशा तो है आपने हमें और हमें अपने अस्तित्व की पहचान कराई, ऐसे ही नहीं बनते हम जगमगाते सितारे । कभी दोस्त बनकर संभाला, तो कभी बेटी बनकर मान बढ़ाया, इस जग की हर नीव में, बस तेरा ही अक्स नज़र आया। तू कोमल है पर कमज़ोर नहीं, तू शक्ति का ही अवतार है, सच तो ये है नारी कि तुझसे ही ये पूरा संसार है। महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !