Suraj pandit 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Save the girls 90963 0 Hindi :: हिंदी
होई अंकुरण जगत में,
लगत ऐसो चंद्रमुखी सुहाई ।
देखत न कोई चंद्रमुखीयन सो,
होई आँखों में चंद्रमा छुपाई ।
सोचत अंकुरण के भविष्य,
होई गोद चंद्रमा आई ।
होवत जब कोई चंद्रमुखी,
सोचत सो परायों धन सुनाही ।
अवत है न ज्ञात कोई,
कहे जग क्यों परायों धन सुनाही ।
होवत न संसार चंद्रमुखीयन के,
है प्यारों संसार छुपाई ।
फूलों के लागत चंद्रयन सो,
है मिठे वाण रसाई ?
कहत सूरज गीत पूरान के,
चंद्रयन जग देवी कहाई ।
--------सूरज पंडित