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मुसाफ़िर चलता जा-मिलेगी। तुम्हें तुम्हारी मंजिल

कुमार किशन कीर्ति 27 May 2023 कविताएँ अन्य सफलता, निशा,मुसाफ़िर 28706 0 Hindi :: हिंदी

कभी तो मिलेगी,
कही तो मिलेगी।
तुम्हें तुम्हारी मंजिल
बस,मुसाफ़िर चलता जा।
सदैव ना निशा रहती,
सदैव ना प्रभात रहता।
ओ नादान मुसाफ़िर,
इस बात को समझ।
सफ़लता और असफलता
हैं जीवन की दो पहलू।
फिर,तुझे सफलता पाना है।
कभी तो मिलेगी,
कही तो मिलेगी।
तुम्हें तुम्हारी मंजिल,
बस मुसाफ़िर चलता जा।

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