चंद्र प्रकाश 08 Apr 2023 कविताएँ समाजिक 40296 0 Hindi :: हिंदी
मिलने की तड़फ –(25F) मिलने की तड़फ तुमसे, तडफाने लगी, शक्ल तुम्हारी दिल में, एक -एक कर इतराने लगी, छुटे रोज के काज, खुलेंगे दिल में दबे राज, आज मिलने के अरमान, भले हो दो दिन के मेहमान ख़ुशी, खिला चहेरा अपना दर्शाने लगी मोह माया रंग अपना ज़माने लगी, तुम्हारी याद आने लगी, मिलने की तड़फ तुमसे, तडफाने लगी II1 II उत्त्साह/ उल्लास ऊर्जा दिखाने लगी, सामान की गठरी भी रोब ज़माने लगी, बोझ अपने को बताने लगी, परिवार में भाईचारे का महत्व, घडी, अवसर को समझाने लगी जिनको बोद्ध नहीं, अपनों से मिलने का करते विरोध वही मौहबत साथ चलने की शरत बताने लगी, आज सड़क भी, लगा जाम हमें आजमाने लगी, मिलने की तड़फ तुमसे, अब तडफाने लगी II2 II चन्द्र प्रकाश @ सेठी