Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 कविताएँ देश-प्रेम #मिट्टी की परिभाषा #किसको कह दु बनो देश की आशा # 25336 0 Hindi :: हिंदी
मैं क्या दूंगा इस मिट्टी को परिभाषा? किसको कह दूं तुम बनो देश की आशा ? अंधो बहरों देखो यह नया तमाशा । लो सुनो मेरे आजाद भगत की भाषा ।। सोचो! क्यों है मेरे स्वर में अंगारे ? मैंने श्रृंगारिक स्वप्न किसलिए मारे ? किसलिए पूर्णिमा के बिहार त्यागे हैं? किसलिए राम फिर से वन को भागे हैं? किसलिए चीखता हूं और चिल्लाता हूं? किसलिए स्वयं को दोष दिए जाता हू? किसलिए खून को पानी बोल रहा हूं? किसलिए क्रांति की वाणी बोल रहा हूं? कारण क्या है विषबाण साध रख्खा है? उंगली पर एक पहाड़ साध रख्खा है ।। कारण क्या है रतजगा चुना है मैंने? क्योंकि मां को अपशब्द सुना है मैंने । किसकी खातिर बलिदान गा रहा हूं मैं? क्यों मिट्टी को वरदान गा रहा हूं मैं? किसकी समाधि पर मान रहा हूं मैं? भारत को क्यों भगवान गा रहा हूं मैं? पंडित विशाल मिश्रा।