मनीष राठौड 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य मनीष राठौड (मानाराम ) 30957 0 Hindi :: हिंदी
निहार का मौसम को
चले खेतों को
कंधे पर हल धोकर
हाथ में बीज लेकर
चले खेतों को
मौसम है सर्दी का
वर्दी है सर्दी की
न जाने मौसम का उजास
न माने मौसम है पाले का
खुद को कर बैठे सर्दी के हवाले
पता नहीं है कितनी आवक
क्या पता है कितनी फसल
मनीष राठौड (मानाराम )