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मनुष्य

Rajnish khandal 19 Feb 2025 कविताएँ हास्य-व्यंग 33491 0 Hindi :: हिंदी

शब्दो में बड़ा सुंदर मानव, कहो तो भगवान है मानव।
   बनो तो है दानव-मानव, सोचो तो श्री राम है मानव।
   देवो की ललकार है मानव, शेरो का सरदार है मानव।
   भाई - पिता को भी ना बक्से, वो गद्दी का गद्दार है मानव।
   मातृभूमि पर शीश चढ़ा दे, वो शौर्य का सरताज भी मानव।
  पर वो सब तो थी पुरानी बाते, आज वो मानव नज़र ना आते।
   जो पिता की आज्ञा से वन में जाते, चरण पादुका रख राज्य चलाते।
   शिव भी जिनको शीश झुकाते, जब महाकाल बन रण में आते।
   अरे!  कहा गया वो रण का घोड़ा, मुगलों को था जिसने खदेड़ा।
    कहा गया आज ऐसा पंडित, अखंड भारत निर्माण सिकंदर खंडित।
    बड़ा सुंदर इतिहास हमारा, "अतिथि देवो भव" सा ​​ध्येय प्यारा।
    पर मन में मेल जो लेकर आए, आए जैसे वापस जा ना पाए।
   आवो ऐसे महापुरुषों की वन्दना गाएं, नित-नित शीश उन्हें झुकाये।

                  रचनाकार = रजनीश खाण्डल

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