Anilkumar Rathwa (Sameer) 27 Jan 2026 कविताएँ समाजिक “मानवता की पाठशाला” 4752 0 Hindi :: हिंदी
हम सब यात्री हैं एक ही राह के, नाम अलग हैं, मंज़िल एक, कोई तेज़ चलता, कोई रुकता है, पर समय सबका साथी एक। कोई सिखाता, कोई सीखता है, कभी जीवन खुद ही गुरु बन जाता है, जो गिरकर मुस्कुरा ले ज़मीन पर, वही असली ऊँचाई पाता है। हम ढूँढते हैं दुनिया में अर्थ, धन, पद, तालियों के शोर में, पर अर्थ छुपा है उस पल में, जब दिल धड़कता है किसी और के लिए भी जोर से। हर चेहरा एक कहानी है, हर आँख एक सवाल, जो दूसरों को समझ गया, वही पढ़ पाया जीवन का हाल। दिन हमें धैर्य सिखाता है, रात हमें विश्वास, और जो अंधेरे से दोस्ती कर ले, उसे मिलती है अपनी ही रोशनी की आस। मत पूछ जीवन क्या देगा, पूछ तू जीवन को क्या देगा, क्योंकि जो बन जाता है किसी का सहारा, वही खुद को सबसे पहले पा लेता है। तो याद रख, तू अकेला नहीं, तेरी साँसें भी इस संसार की हैं, जब तू बेहतर बनता है हर रोज़, तभी दुनिया थोड़ी बेहतर बनती है।