Rupesh Singh Lostom 17 May 2023 कविताएँ अन्य मैंने देखा हैं उसे 25311 0 Hindi :: हिंदी
मैंने देखा हैं उसे वक्त को हराते आशमा झुकाते गुथियाँ सुलझाते कठिन मार्ग में रास्ता बनते मैंने देखा हैं उसे लहरों पे आशिया बनाते भवर में गोता लगाते समय को आजमाते तूफान से टकराते काल को घुटने पे लाते मैंने देखा हैं उसे