Vipin Bansal 30 Mar 2023 कविताएँ धार्मिक 109858 0 Hindi :: हिंदी
कविता = ( मैं नहीं मानता ) झूठी तारीफ़ों के पुल ! मैं नहीं बाँधता ! पत्थरों को ख़ुदा ! मैं नहीं मानता ! कर्म का लेखा लिखना मुझे ! हाथों पर भरोसा अपने मुझे ! लकीरों की लिखाई ! मैं नहीं मानता ! झूठी तारीफ़ों के पुल ! मैं नहीं बाँधता ! पत्थरों को ख़ुदा ! मैं नहीं मानता ! कल की यहाँ किसको फ़िक्र ! आज को ही जी लें होकर नीडर ! कल के भीतर ! मैं नहीं झांकता ! कर्म के बीज बोता चला ! खुद पर भरोसा होता चला ! उम्मीद ए मुकद्दर ! मैं नहीं पालता ! झूठी तारीफ़ों के पुल ! मैं नहीं बाँधता ! पत्थरों को ख़ुदा ! मैं नहीं मानता ! कर्म से बढ़कर न कुछ भी यहाँ ! कर्म ही छोड़े अपने निशां ! कर्म की दौलत चलती वहाँ ! कर्म के बना दे अपने निशां ! कर्म की दौलत कमा ले यहाँ ! फिर न मिटेंगे तेरे निशां ! देख कंगला मैं भी यहाँ ! इस दौलत को दौलत ! मैं नहीं मानता ! झूठी तारीफ़ों के पुल ! मैं नहीं बाँधता ! पत्थरों को ख़ुदा ! मैं नहीं मानता ! विपिन बंसल