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मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता

शरद भूषण मोंगरा 25 Apr 2026 कविताएँ समाजिक 3082 0 Hindi :: हिंदी

"मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता"

मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता यूं ही जिस ओर देखता हूं, 
दर्द में डूबे लोगों की "आह" जब भीतर उतरती है 
निकाल लाती है वो शब्दों को उमड़ी वेदनाओं से 
वही लिख देता हूं जो देखता महसूस करके हूं
कि कितना दर्द है दुख है, खुदा के इस जमाने में।


शरद भूषण मोंगरा 
कवि गीतकार लेखक

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