संदीप कुमार सिंह 25 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 25299 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) मैं झूमता हुआ बादल मेरी तुम बावली। मदहोश जवानी सूरत तेरी है साँवली। कसमें न तोड़ना हमको न छोड़ना कल्पना_ तुझे देखने को ये नजर रहती उतावली। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....