माही मौर्या 13 Apr 2026 कविताएँ अन्य मैं क्या हूँ....???? 4924 0 Hindi :: हिंदी
मैं तपती हुई रेत की प्यास हूँ...! पर जब आँखों से छलकूं तो , ऐहसास ख़ास हूँ.....! मैं गहरी नींद का सुकुन भी हूँ , और जागती आस भी.... टूटकर जो बिखर जाऊँ तो, किसी का हसीन ख़्वाब हूँ...! मैं गहरा नीर हूँ , तो उसे पार लगाती नाव भी, कड़ी धूप के सफ़र में, मैं ही घनी छाँव हूँ...! मैं ही रक्षक का अस्त्र हूँ , और प्रहार का शस्त्र भी..! मैं पावन वेद की ऋचा,और सिद्ध मंत्र भी.... मैं शब्दों का गीत हूँ ,और सुरों का लयबद्ध संगीत भी..! पहाड़ों से गिरता झरना,और बहती मंद समीर हूँ मैं...!