Kishor Kumar Bhardwaj 03 Mar 2025 कविताएँ धार्मिक 20039 0 Hindi :: हिंदी
शक्ति के प्रेम में शिव भी बदल गए थे, वैरागी से किसी के हमसफ़र बन गए थे। जो ध्यान में लीन, विरक्त थे सदा, प्रेम के स्पर्श से शक्ति के हो गए थे। जो कण-कण में संपूर्ण थे, स्वयं में ही पूर्ण, अपरंपार थे। पर प्रेम की आहुति जब शक्ति ने दी, तो शिव भी समर्पण को तैयार थे। एक प्रेम की तपस्या थी, एक चिंतन के आधार थे, जब पार्वती ने व्रत रखा, तब शिव भी निराहार थे। जो काल के परे, अजेय और अटल थे, आज प्रेम की डोर से बंध गए थे। ध्यान में गहरे, अनजाने भावों में, प्रेम की अनुभूति ने हलचल कर दी। पार्वती की प्रार्थना का ऐसा असर हुआ, कि स्वयं महादेव ने भी साधना कर दी। गंगा-सी निर्मल, हिम से पवित्र, शक्ति के हृदय में शिव हुए समर्पित। तांडव में अब भी वही प्रचंडता थी, पर प्रेम में शीतलता भी समाहित थी। शक्ति ने जब प्रेम की परिभाषा लिखी, तो शिव ने उसे अपने हृदय में रचा। सृष्टि के नियमों को नया रूप मिला, जब संन्यासी भी प्रेम में सजा। गंगा-सी धारा, जटाओं में समाई, पार्वती के प्रेम ने अर्द्धनारीश्वर छवि बनाई। तांडव भी वही, और करुणा भी वही, शक्ति के साथ शिव ने नई राह पाई। त्याग और भक्ति की अनुपम कहानी, शिव और शक्ति का अमर प्रेम संगम। युगों-युगों तक यह मिलन रहेगा अमर, क्योंकि सृष्टि का आधार था यही समर्पण। - ✍️के.भारद्वाज ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव.. #शुभ_महाशिवरात्रि