कुमार किशन कीर्ति 13 Apr 2025 कविताएँ दुःखद तन्हा, ज़िंदगी 31728 0 Hindi :: हिंदी
मैं तन्हा हूं। इस महफ़िल और फिज़ाओं में इन हसीं वादियों में मैं तन्हा हूं। कभी जो ख़्वाब देखा था, इन आंखों में। आज सब कुछ फना हो गया मैं ज़िंदगी की राह में तन्हा रह गया। मैं तन्हा हूं। अपनों के बीच,और सवालों के करीब। कभी_कभी ढूंढता है यह दिल खो गए ज़िंदगी की हसीं पलों को। मगर, धीरे _धीरे सब कुछ फना हो गया मैं फ़िर तन्हा रह गया। : कुमार किशन कीर्ति।