Rambriksh Bahadurpuri 02 Jun 2025 कविताएँ हास्य-व्यंग #रामवृक्ष बहादुरपुरी#अम्बेडकरनगर पोइट्री साहित्यिक मंच #नेता पर कविता #व्यंग्य कविता 17475 0 Hindi :: हिंदी
मैं नेता हूॅं
न जानी क्यों?
बार बार मां के
मारने
डांटने
समझाने
के बाद भी
पांव स्वयं
रुक जाता था
खिंच जाता था
स्कूल की राह से।
न जानी क्या?
सहमति थी
पांव और मन के बीच
न पांव बढ़ा
न मन लगा।
न जानी क्यों?
मन अनपढ़ रहकर भी
जुगाड़ से
जीवन जीना
बड़ी-बड़ी बातें करना
सीख लिया,
और आज मैं
अनपढ़ हूॅं
लोगों को लड़ाता हूॅं
दंगा कराता हूॅं
झूंठ बोलता हूॅं
नफ़रत फैलाता हूॅं
घोटाला करता हूॅं
जिम्मेदार हूॅं
बालातकार का
अत्याचार का
दंगे फसाद का
हत्या दुराचार का
बाज नहीं आता हूॅं
कोई भी खेल खेलने में
कुर्सी के लिए
और आज मैं
अधिकारियों
विद्वानों
समझदारों का विजेता हूॅं
क्यों कि मैं नेता हूॅं।
रचनाकार
रामवृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...