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लेके अधूरे आज कुछ ख्वाब सजाने आया हूँ

Pravin Chaubey 08 May 2025 कविताएँ धार्मिक #kavita#poeam#poetey#shayari 17627 0 Hindi :: हिंदी

लेके अधूरे आज कुछ ख्वाब सजाने आया हूँ,
टूटे हुए मन में एक उम्मीद जगाने आया हूँ।

चुपचाप सी रातों से कुछ बात करने,
आँखों के समंदर में एहसास भरने आया हूँ।
बिखरी हुई साँसों को फिर से पिरोने,
इस वीराने दिल को फिर से बसाने आया हूँ।

जो लम्हे बिखर गए थे वक़्त की गर्द में,
उन्हें यादों के झरोखों से उठाने आया हूँ।
छूटी हुई मुस्कानें, थमी हुई हँसी,
सब वापस उस चेहरे पे लाने आया हूँ।

तेरे बिना अधूरी थी हर एक दुआ,
अब उन्हीं दुआओं में तेरा नाम लगाने आया हूँ।
लेके अधूरे आज कुछ ख्वाब सजाने आया हूँ,
टूटे हुए मन में एक उम्मीद जगाने आया हूँ।

                -   प्रवीण चौबे

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