Mithun anuragi 26 Jan 2025 कविताएँ देश-प्रेम Desh bhakti shayari, Desh bhakti kavita, Desh bhakti poems, Mithun Anuragi, republic day shayari, 26 January shayari,26 January bhashan, क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते 54445 0 Hindi :: हिंदी
क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते
क्या हम जन्मे हैं इतिहास वीरों का पढ़ने को,
क्या अब धरा नहीं है अंग्रेजों से लड़ने को ।
क्या अब सूख गई है स्याही लेखनी की ,
क्या अब शब्द नहीं हैं कुछ गढ़ने को।।
हम गांधी,भगत, लक्ष्मी, जवाहर लाल नहीं बन सकते,
क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते।।
न हो आंचल मैला, मिटे दाग दामन का,
न छूटे सिंदूर मांग से किसी दुल्हन का ।
न किसी बहन की अब राखी सूनी हो,
न बुझे चिराग किसी पिता के आंगन का।।
क्या हम रक्षक ढाल नहीं बन सकते,
क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते।।
न फीका रंग हो मां भारती की कौमुदी का,
अब न हो यहां चीर हरण किसी द्रौपदी का।
अब हलधर न लटके कर्जे में फंदे से,
न सोए भूखा बेटा किसी गोदी का
क्या हम दरिद्रता का काल नहीं बन सकते,
क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते।।
हो राम नाम हर मुस्लिम घर में,
पढ़ ली जाए नवाज़ मंदिर में।
न भेद भाव हो आपस में,
न झगड़े किसी डगर में।।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई क्या इक मां के लाल नहीं बन सकते,
क्या हम भारत मां के लाल नहीं बन सकते।।
Written by
Mithun Anuragi