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ख़्वाब न बनता हक़ीक़त युग-युगत कर हारा

मोती लाल साहु 02 Sep 2023 कविताएँ अन्य ख़्वाब नहीं हक़ीक़त, युग-युगत कर हारा, ख़्वाबों का नाता ए-जग, दिल में सत्-चित्-आनन्द, फिर क्यों फिरे मानव? 20272 0 Hindi :: हिंदी

ख़्वाब न बनता हक़ीक़त, 
फिर क्यों फिरे मानव?
युग-युग हारा युगत कर, 
फिर क्यों फिरे मानव??

ख़्वाबों का नाता ए-जग, 
फिर क्यों फिरे मानव?
सत्य का नाता हक़ीक़त, 
फिर क्यों फिरे मानव??

वह बसे हृदय-कमल पर, 
फिर क्यों फिरे मानव?
दिल में सत्-चित्-आनन्द, 
फिर क्यों फिरे मानव??
-मोती

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