Pratibha Khadekar 22 Feb 2025 कविताएँ दुःखद प्रतिभा खडेकार 29402 0 Hindi :: हिंदी
ख्वाब
,,,,,,, प्रतिभा खडेकार
,,,,,बंद आंखों के सपने
,, खुली आंखों के ख्वाब
,,, क्या अंतर है दोनों में कहाँ
,,,,,, दोनों ही अपने हैं
,,,,, बंद आंखों के सपने
,,खुली आंखों के ख्वाब
,,, कुछ सच्चे कुछ झूठे हैं..
,,, कुछ भयानक तो कुछ सादगी भरे हैं
,,,,, तुम्हने देखे जो है सपने
,,, हमने चाहे जो है ख्वाब
,,,, नींद टूटी टूटे सपने
,,,,, जहां नींद ना हो, अपार
,,,, बंद आंखों के सपने
,,, खुली आंखों के ख्वाब
,,,,, जागे थे उन आंखों में ख्वाब
,,,,,,,जहां दर्द बर्दाश्त न होता
,,,,, न हारे न टूटे न बिखरे
,,,,,,, खुली आंखों के ख्वाब
,,, बंद आंखों के सपने
,,,,, खोजने के प्रयास में
,,, दोस्ती के आगास में
,,,, धब्बे उड़ती चुनर में
,,,,, ख्वाबों को छुना आसान नहीं
,,,,,, प्रयास में हार नहीं
,,,, कर्म, फल की उमंग न कर
,,,,, मुस्कुराहट में फल न पाना
,,,,, आंखों के अश्रु में उन्हें झलकाना
,,,, बंद आंखों के सपने
,,,,,, खुली आंखों के ख्वाब