DINESH KUMAR KEER 10 May 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 28730 0 Hindi :: हिंदी
रोता है आसमान क्यों सारा , रोती है क्यों हवाएँ ? थम गई है इस शहर की सांसे कोई नज़र न आये , तेरी एक तिरछी नज़र ने हमें कहाँ पर पहुंचा दिया, अपनी हद में रहने को हमें एक रास्ता बता दिया , “सादगी ” से रहने का सबक सबको सिखा दिया , अनमोल जिंदगी की चाह ने तेरे क़दमों में ला दिया I रोता है आसमान क्यों सारा , रोती है क्यों हवाएँ ? थम गई है इस शहर की सांसे कोई नज़र न आये , गुलशन को छेड़ते-2 हुए वो किस मुकाम पर आ गए , दौलत की चमक देखते-2 हुए मौत के करीब आ गए , नफरत का कारोबार करते-2 गर्त के नजदीक आ गए, तू ही बचा ले इस जहाँ को को तेरी दहलीज पर आ गए , रोता है आसमान क्यों सारा , रोती है क्यों हवाएँ ? थम गई है इस शहर की सांसे कोई नज़र न आये , सोलह श्रृंगार करके तेरे दर दुखयारी तेरी ओर निहार रही, “फूलों” को माफ़ कर दे बड़ी आस से तेरी राह को देख रहीं, पिया की आँगन में खड़ीं होकर रहम की भीख मांग रही , अपनी नज़रों का दे दे सहारा फूलों की अँखियाँ ढूढ़ रही I रोता है आसमान क्यों सारा , रोती है क्यों हवाएँ ? थम गई है इस शहर की सांसे कोई नज़र न आये , कली से जब कली मिली तो फूलों की एक नगरी बस गई, नेकी से जब नेकी मिली तो इंसानियत की “दिया” बन गई , गरीब-मज़लूम की ओर उठे हाथ तो पिया की प्यारी बन गई, इंसानियत की ओर बढ़े हाथ तो “कीर” तेरी दीवानी बन गई I रोता है आसमान क्यों सारा , रोती है क्यों हवाएँ ? थम गई है इस शहर की सांसे कोई नज़र न आये ,