Saurabh Sonkar 25 Oct 2025 कविताएँ धार्मिक किस्मत और सफलता किस्मत के भरोसे तुम भी बैठे ही रह गये फिर तो तुम्हारा भी कुछ हो नहीं सकता खुद को परिस्थितियों के अनुकूल ढाल के संघर्ष के दिनों में फल की चिंता किए बिन कर्म पूरे मन से कर लोगे तुम भी जिस दिन किस्मत रूपी मकान का निर्माण हो उठेगा..! कर्म के समय तुम किस्मत भरोसे रहोगे असफलता के बाद खुदको दोषी मानोगे शेष कीमती जीवन अंधकार में कर लोगे सब कुछ ये सिर्फ तुम्हारी अज्ञानता ही है फिर न तुमने सफलता क सच ही समझा और न शिक्षा, न जीवन का सार समझा..! अपनी विपरीत परिस्थितियों में जब तुम भी खुद को अनुकूल बनाओगे सही समय पर सही दिशा में कठिन परिश्रम करके सारे संयोग बनाओगे बाबू, तब जाकर कहीं किस्मत बनती है तब तुम भी अपना जीवन चमकाओगे..! यह बात डाल लो अपने भेजा में तुम सब तुम सब अब कोई एक्सक्यूज नहीं दोगे जिसको इस धरा पे कुछ कर जाना है उसको सब धैर्य - धरे सह जाना होगा उगते हुए सूरज को दुनिया सलाम करती है कर अनदेखा कीचड़ कमल सा खिलना होगा..! - सौरभ सोनकर #Saurabh_Sonkar #किस्मत_और_सफलता 7951 0 Hindi :: हिंदी
किस्मत और सफलता
किस्मत के भरोसे तुम भी बैठे ही रह गये
फिर तो तुम्हारा भी कुछ हो नहीं सकता
खुद को परिस्थितियों के अनुकूल ढाल के
संघर्ष के दिनों में फल की चिंता किए बिन
कर्म पूरे मन से कर लोगे तुम भी जिस दिन
किस्मत रूपी मकान का निर्माण हो उठेगा..!
कर्म के समय तुम किस्मत भरोसे रहोगे
असफलता के बाद खुदको दोषी मानोगे
शेष कीमती जीवन अंधकार में कर लोगे
सब कुछ ये सिर्फ तुम्हारी अज्ञानता ही है
फिर न तुमने सफलता क सच ही समझा
और न शिक्षा, न जीवन का सार समझा..!
अपनी विपरीत परिस्थितियों में जब
तुम भी खुद को अनुकूल बनाओगे
सही समय पर सही दिशा में कठिन
परिश्रम करके सारे संयोग बनाओगे
बाबू, तब जाकर कहीं किस्मत बनती है
तब तुम भी अपना जीवन चमकाओगे..!
यह बात डाल लो अपने भेजा में तुम सब
तुम सब अब कोई एक्सक्यूज नहीं दोगे
जिसको इस धरा पे कुछ कर जाना है
उसको सब धैर्य - धरे सह जाना होगा
उगते हुए सूरज को दुनिया सलाम करती है
कर अनदेखा कीचड़ कमल सा खिलना होगा..!
- सौरभ सोनकर