संदीप कुमार सिंह 01 Aug 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30804 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) कंगन की आवाज ने,हलचल कर दी यार। रहे जिगर में अब वही,रहती खुशी अपार।। दुल्हन का कंगन कहे,दुनिया में है प्रीत। जिससे जीवन में मजा,और रहे संगीत।। खनका कंगन रात में,गमके अब निज वक्ष। देखा तो जब सामने,साया था बन रक्ष।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....