Amit Kumar Ranjan 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक राष्ट्रवाद 107661 0 Hindi :: हिंदी
झूठा राष्ट्रवाद
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देश की जनता परेशान है,
छाया है घर -घर मे गम|
देश मे एक अभियान चला,
घर-घर झंडा फहराए हम ||
लूट लिया इस देश को तुमने ,
मिल जुल दोस्त तुम्हारे |
कर्ज माफ किया खरबो का,
लूट गए बैंक भारत के सारे ||
बहु-बेटीयो की गरिमा ,
तार-तार रोज होती है |
ये देख माँ भारती भी,
खून के आँशु रोती है ||
रोजी-रोटी की बात ना होती ,
भाषण का अब जमाना है|
अर्थव्यवस्था कौन देखे अब,
लोगो को मूर्ख बनाना है ||
जिन मुद्दों पर साहब आये,
वो मुद्दा अब भुला दिया |
धर्म एक अफीम है ,
सबको धीरे-धीरे पिला दिया ||
नही जागोगे तुम अगर ,
खून के आँशु रोवेगे |
औलाद तुम्हारी कटेगी वही,
आज अभी तुम बोवोगे ||
कलम से ----
अमित कुमार
ग्राम-मड़ही ग़ाज़ीपुर (यूपी)